भारी सा है मन, February 16, 2023 भारी सा है मन, जा कहीं ठहरा सा है। रखा है कैद, उन ख्वाहिशों सा है। हो जाए, रिहा भी एक दिन एक मासूम, सपने सा है। मगर धुंधले है, ये दूर के सपने, शायद दोष, उम्र के तकाज़े का है।। x Read more